






खड़कपुर शहर के विभिन्न इलाकों में गणेश पूजा का पर्व पूरे उत्साह और रचनात्मकता के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष शहर के न्यू सेटलमेंट क्षेत्र में स्थापित दो अलग-अलग पूजा पंडाल अपनी खास थीम और सामाजिक संदेशों के कारण श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं।


’मां ही बच्चे की पहली गुरु’: पारंपरिक वस्तुओं से सजा पंडाल

न्यू सेटलमेंट इलाके में इस वर्ष गणेश पूजा के 30वें वर्ष के उपलक्ष्य में एक विशेष थीम पर आधारित पंडाल तैयार किया गया है। यहां का मुख्य विषय ‘मां ही बच्चे की पहली गुरु’ (Mother is the first teacher of a child) रखा गया है।
प्रतिमा की विशेषता: भगवान गणेश की प्रतिमा के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि मां पार्वती अपने पुत्र गणेश को शिक्षा प्रदान कर रही हैं। यह स्वरूप समाज को संदेश देता है कि किसी भी बच्चे के जीवन में मां ही सबसे पहली और महत्वपूर्ण शिक्षक होती है।
पारंपरिक सजावट: पूजा मंडप को पुराने और पारंपरिक ग्रामीण परिवेश की वस्तुओं से सजाया गया है। इसमें बांस की टोकरियां, ताड़ के पत्तों से बने हाथ के पंखे, मिट्टी के बर्तन और पारंपरिक देसी सामग्रियां शामिल हैं, जो लुप्त हो रही ग्रामीण संस्कृति और विरासत की याद दिलाती हैं।
तितली थीम पर सजा पंडाल: पर्यावरण संरक्षण का आह्वान
वहीं न्यू सेटलमेंट क्षेत्र के जुआड़ी चौक पर पर्यावरण जागरूकता को केंद्र में रखकर एक बेहद आकर्षक पूजा पंडाल बनाया गया है। यहां ‘तितली’ को मुख्य थीम के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
संरक्षण का उद्देश्य: आधुनिक दौर और बदलते पर्यावरण के कारण घटती तितलियों की संख्या के प्रति लोगों को जागरूक करना इस थीम का मुख्य उद्देश्य है।
कलात्मक स्वरूप: पंडाल के भीतर भगवान गणेश की प्रतिमा को सूरजमुखी के फूल पर बैठी तितली के रूप में बेहद कलात्मक ढंग से स्थापित किया गया है। पूरा पंडाल रंग-बिरंगी तितलियों के विभिन्न रूपों और रंगों से सजाया गया है।
धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारिवारिक मूल्यों, लुप्त होती लोक-संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का यह अनूठा संगम स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के बीच काफी सराहा जा रहा है। इन दोनों पंडालों में दर्शन के लिए भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ रही है।





