





तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे कथित ‘अंतर्कलह ‘ और टूट के संकट के बीच, पार्टी सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर सड़क पर उतरकर लड़ाई का शंखनाद कर दिया है। जब पार्टी ताश के पत्तों की तरह बिखरती हुई नजर आ रही है, ऐसे मुश्किल समय में ममता बनर्जी का यह रुख राजनीतिक गलियारों में एक महत्वपूर्ण संदेश दे रहा है।



मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे अपने कालीघाट स्थित आवास से निकलकर ममता बनर्जी सबसे पहले रेड रोड पहुंचीं, जहां उन्होंने बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद वह धर्मतल्ला के वाई चैनल (Y Channel) स्थित धरना मंच पर पहुंचीं और वहां से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को कड़ी चेतावनी दी। इस दौरान उनके साथ मदन मित्रा, कुणाल घोष, असीमा पात्रा, कल्याण बनर्जी और दोला सेन जैसे कई प्रमुख विधायक और सांसद मौजूद थे।

धरना मंच पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ थी और ‘जय बांग्ला’ के नारों के बीच ममता बनर्जी ने अपना भाषण शुरू किया। अपने संबोधन में उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, “मुझे कोई रोक नहीं सकता। मैं संविधान की रक्षा करूंगी और भाजपा के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखूंगी।”
उन्होंने विरोधी खेमे पर आरोप लगाते हुए कहा, “हमारे कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमले हो रहे हैं। वे हमारे सांसदों, विधायकों और पार्षदों को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। अनैतिक रूप से सभी को डराया-धमकाया जा रहा है, लेकिन आप लोगों को एकदम डरने की जरूरत नहीं है।”
अपने आक्रामक तेवर को बरकरार रखते हुए ममता बनर्जी ने प्रशासन को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “जो लोग आ रहे हैं, उन्हें अंदर आने दें। वरना लालबाजार (पुलिस मुख्यालय) का घेराव किया जाएगा, नबान्न का घेराव होगा और राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों को भी घेरा जाएगा। पश्चिम बंगाल में अब बुलडोजर की राजनीति चल रही है और सभी को धमकियां दी जा रही हैं।”
धर्मतल्ला में हुए इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में विधानसभा के विरोधी दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय, नयना बनर्जी, चंद्रिमा भट्टाचार्य, फिरहाद हकीम और अशोक देव जैसे कई वरिष्ठ तृणमूल नेता भी उपस्थित थे। भारी नारेबाजी और उत्साह के बीच ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं।





