




कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सोमवार से नया ‘गुंडा दमन कानून’ लागू हो गया है। इस कानून के लागू होते ही राज्य की राजनीति गर्मा गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार इस कानून के जरिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और इसका इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।


विपक्ष का विरोध और कानूनी चुनौती

इस कानून के खिलाफ सीपीएम और कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। सीपीएम नेता और वकील सव्यसाची चटर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर इसे असंवैधानिक और मौलिक अधिकारों का हनन बताया है। उन्होंने इसे 1923 के ‘कलकत्ता गुंडा एक्ट’ की पुनरावृत्ति करार दिया। वहीं, प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने भी इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे ‘दमनकारी बिल’ कहा है और हाई कोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि ‘गुंडा’ शब्द की स्पष्ट परिभाषा तय किए बिना इस कानून का भारी दुरुपयोग हो सकता है।
क्या हैं नए कानून के कड़े प्रावधान?
‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल-2026’ नामक इस कानून के तहत पुलिस को विशेष अधिकार दिए गए हैं।
यदि पुलिस को केवल संदेह होता है कि कोई व्यक्ति अशांति फैला सकता है या किसी के कार्यों से सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा है, तो उसे बिना मुकदमा चलाए एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।
अब नियमित रूप से असामाजिक गतिविधियों में शामिल लोगों, सिंडिकेट चलाने वालों और अवैध कार्यों में पैसों की फंडिंग करने वालों को भी इसी सूची में रखा जाएगा।
इस कानून के तहत अपराधों को गैर-जमानती माना गया है। दोष साबित होने पर अधिकतम तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अपराधियों को पनाह देने और उनकी मदद करने वालों पर भी इस कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का पक्ष
राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मुर्शिदाबाद के बहरामपुर में एक प्रशासनिक बैठक और जनसभा के दौरान इस नए कानून के लागू होने की आधिकारिक घोषणा की। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस कानून के प्रभावी होने से राज्य में हिंसा, आतंक और अशांति पर स्थायी रूप से लगाम लगेगी। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि राज्य में किसी भी तरह की अशांति बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पुलिस अब नए कानून का सख्ती से इस्तेमाल करेगी। गौरतलब है कि 29 जून को विधानसभा में पास हुए इस बिल पर राज्यपाल आर.एन. रवि ने हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में लागू कर दिया गया है।





