




राज्य के सरकारी स्कूलों और शिक्षा प्रणाली में कई बड़े और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहे हैं। हाल ही में शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई कड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों के लिए बेहतर, सुरक्षित और आधुनिक शैक्षणिक माहौल तैयार करना है।


बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में होगा विकास

बालिकाओं और छात्राओं के स्वास्थ्य व स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए, सभी स्कूलों व कॉलेजों में सेनेटरी नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाई जाएंगी। बच्चों को साफ पीने का पानी मिल सके, इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले वाटर प्यूरीफायर लगाए जाएंगे। इसके अलावा, अत्यधिक गर्मी वाले क्षेत्रों के विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर पंखे लगाने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के हजारों स्कूलों को अपग्रेड करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें गैस पर खाना पकाने की व्यवस्था, चरणबद्ध तरीके से सोलर पैनल लगाना, आर्सेनिक-मुक्त पेयजल और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं।
निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर रोक
निजी शिक्षण संस्थानों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि शिक्षा का व्यवसायीकरण (Commercialization) बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निजी स्कूलों और विश्वविद्यालयों का अब कड़ाई से निरीक्षण (Inspection) होगा। यदि वे सभी नियमों का सही से पालन करते हैं और छात्रों की फीस को नियंत्रित रखते हैं, केवल तभी उन्हें आगे काम करने की मंजूरी या एनओसी (NOC) दी जाएगी।
मिड-डे मील की गुणवत्ता और बजट में वृद्धि
आगामी 1 अगस्त से प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे मील का आवंटन 6.78 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये प्रति छात्र कर दिया जाएगा। बड़े शहरों के कई हिस्सों में मिड-डे मील वितरण की जिम्मेदारी एक प्रमुख गैर-सरकारी संस्था को सौंपी जा रही है, जो बच्चों को अत्यधिक उच्च गुणवत्ता वाला और पौष्टिक भोजन प्रदान करेगी।
अभिभावकों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
स्कूलों के बेहतर और पारदर्शी संचालन के लिए जल्द ही विधानसभा में एक नया कानून लाया जाएगा। इसके तहत, स्कूल प्रबंधन के लिए चेयरमैन या वाइस-चेयरमैन का पद छात्रों के अभिभावकों (Guardians) में से ही किसी को दिया जाएगा।
शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता
रुकी हुई शिक्षक भर्तियों (विशेषकर 6000 शेष पदों की मौखिक परीक्षा) को जल्द पूरा किया जाएगा। आरक्षण नीति में कमियों के जिस मुद्दे की वजह से भर्तियां सुप्रीम कोर्ट में अटकी थीं, उसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि नई भर्तियों में किसी भी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा। उच्च स्तर के अधिकारियों को इसका प्रशासक नियुक्त किया गया है, और सभी भर्तियां पूरी तरह से योग्यता (मेरिट) और नियमों के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएंगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मिलेगा लाभ
राज्य अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जुड़ गया है। इससे केंद्र सरकार द्वारा मिलने वाले वे सभी फंड और ग्रांट राज्य के शिक्षा विभाग को मिलने शुरू हो जाएंगे, जो पिछले कुछ सालों से रुके हुए थे। इन संसाधनों का इस्तेमाल प्राइमरी स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी स्तर तक की शिक्षा को आधुनिक बनाने में किया जाएगा।
इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य छात्रों को प्राइवेट स्कूलों पर निर्भर होने से बचाना और सरकारी शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना है।






