नराकास खड़गपुर की ओर से आईआईटी में प्रेमचंद जयंती का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन, छत्तीसगढ़ी जस गीत ने मोहा लोगों का मन

August 2, 2026 8:34 PM

 

न रा का स खड़गपुर में प्रेमचंद जयंती का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन 

खड़गपुर में 31 जुलाई2026 को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के राजभाषा विभाग तथा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), खड़गपुर के संयुक्त तत्वावधान में महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती अत्यंत गरिमामय एवं भव्य रूप से मनाई गई। सभी अतिथियों एवं गणमान्य व्यक्तियों ने प्रेमचंद जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। साहित्य, संस्कृति और भारतीय जीवन-मूल्यों को समर्पित इस आयोजन में नगर के विभिन्न विद्यालयों के 300 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर इसे एक साहित्यिक, सास्कृतिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. के. एल. पाणिग्राही, संकायाध्यक्ष (प्रशासन), आईआईटी खड़गपुर ने कहा कि प्रेमचंद केवल एक साहित्यकार नहीं, बल्कि भारतीय समाज के सच्चे चित्रकार थे। उनकी रचनाएँ समानता, न्याय, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ साहित्य, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का समन्वय ही किसी तकनीकी संस्थान की वास्तविक पहचान है तथा ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में सृजनात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. अशोक मिश्र, अध्यक्ष, राजभाषा विभाग ने की। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद जयंती को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रखकर साहित्यिक कार्यशाला, व्याख्यान, प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से एक व्यापक साहित्यिक उत्सव का रूप दिया गया है, जिससे नई पीढ़ी प्रेमचंद की साहित्यिक परंपरा, मानवीय दृष्टि और सामाजिक सरोकारों से जुड़ सके।

मुख्य वक्ता श्री अजय शंकर मिश्र, वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, सेल, कोलकाता ने “प्रेमचंद साहित्य और आज का भारत” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी भारतीय समाज की चुनौतियों और मानवीय मूल्यों को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम है। विशिष्ट अतिथि श्री बाबुल बर्मन, अपर मंडल रेल प्रबंधक (एडीआरएम), खड़गपुर ने विद्यार्थियों को भारतीय साहित्य, मातृभाषा और हिंदी से गहरा जुड़ाव विकसित करने का संदेश दिया।

इस अवसर पर प्रेमचंद निबंध लेखन प्रतियोगिता एवं प्रेमचंद प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिनमें 300 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने प्रेमचंद के जीवन, साहित्य एवं सामाजिक चिंतन पर अपनी उत्कृष्ट समझ का परिचय दिया।

कार्यक्रम में केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो, कोलकाता से श्री अरुण श्रीवास्तव, (सलाहकार) श्री ध्रुव आज़ाद, सहायक निदेशक, एवं श्री नवीन प्रजापति (सलाहकार, राजभाषा समिति वित्त मंत्रालय) के नेतृत्व में चल रहे अनुवाद अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के 11 अनुवाद अधिकारियों ने शैक्षणिक भ्रमण के अंतर्गत सहभागिता की। उन्होंने संस्थान की राजभाषा गतिविधियों का अवलोकन किया तथा कार्यक्रम की साहित्यिक एवं शैक्षणिक उपयोगिता की सराहना की। दल के सभी सदस्यों ने भारतीय ज्ञान प्रणाली, विरासत, केन्द्रीय पुस्तकालय आदि शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक स्थलों का भी भ्रमण किया तथा प्रो. अरिजित दे (अध्यक्ष, आईकेएस), प्रो. गज्जम आदि के साथ शैक्षणिक वार्तालाप किया।  

आयोजन का सांस्कृतिक पक्ष भी अत्यंत आकर्षक रहा। सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं गायक पंडित ओम प्रकाश मिश्र ने प्रेमचंद की रचनाओं एवं भारतीय साहित्यिक परंपरा पर आधारित गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। पं सुरंजीत ने तबले पर तथा श्री अप्रतिम ने गिटार पर उत्कृष्ट संगत देकर वातावरण को संगीत की मधुरता से सराबोर कर दिया। साहित्य, संगीत और संवेदना का यह अनूठा समन्वय उपस्थित श्रोताओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया। इस अवसर पर न रा का स खड़गपुर के अंतर्गत आने वाले कार्यालयों के अधिकारियों, कार्मिकों, परिवारीजन के लिए गीत-गायन प्रतियोगिता एवं काव्य पाठ प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया जिसमें प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया जिसका मूल्यांकन निर्णायक मंडल ने किया। खड़गपुर के तीन प्रतिष्ठत कलाकारों ऋषि सिंह, दीपांशु सिन्हा, मोती लाल साहू ने श्रीमती ममता साहू के निर्देशन में छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी।  

कार्यक्रम में विभिन्न केंद्रीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, विद्यालयों, राजभाषा अधिकारियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं साहित्य प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को संवेदनशील, समावेशी और मानवीय बनाने की प्रेरणा देता है तथा तकनीकी उत्कृष्टता के साथ भारतीय भाषाओं और संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन समय की आवश्यकता है। उपस्थित अतिथियों ने आयोजन को अत्यंत सफल, प्रेरणादायी और अनुकरणीय बताते हुए आयोजकों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। 

कार्यक्रम के संयोजन में वरिष्ठ हिंदी अधिकारी डॉ. राजीव कुमार रावत, वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी श्रीमती सुकन्या शर्मा, श्री सुनील महतो, श्री कालीचरन पाल, श्री वेद प्रकाश मिश्र की उल्लेखनीय भूमिका रही। 

 

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