




पश्चिम मेदिनीपुर: जिले में प्रशासन की पहल पर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना और 125 दिनों की रोजगार योजना को सामने रखकर ग्रामीण विकास कार्यों को गति देना था। बैठक में मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा की गई कि मानसून के दौरान विभिन्न ग्राम पंचायतों में विकास परियोजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से कैसे लागू किया जाए।


इस अहम बैठक में राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री, जिला मजिस्ट्रेट और प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के साथ-साथ जिले के कई विधायक भी मौजूद रहे।

रोजगार योजना का होगा विस्तार:
सम्मेलन के दौरान यह जानकारी दी गई कि 125 दिनों की रोजगार योजना का दायरा और बढ़ाया जाएगा। इसके तहत, अब केवल असंगठित मजदूरों को ही नहीं, बल्कि मजदूरों की तीन अन्य अलग-अलग श्रेणियों को भी इस योजना में शामिल करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सरकार द्वारा विकास के लिए आवंटित किया गया फंड भविष्य में बिना इस्तेमाल के वापस न जाए। इसके लिए अग्रिम योजना और परियोजना-आधारित पूर्व-तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
जल निकासी के लिए आईआईटी (IIT) से ली जाएगी सलाह:
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने जिले के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने मेदिनीपुर और खड़गपुर शहरों की अनियोजित जल निकासी व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि थोड़ी सी बारिश में ही पानी जमा हो जाने से आम लोगों की परेशानी बढ़ जाती है।
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर आईआईटी (IIT) के इंजीनियरों के साथ चर्चा करके एक आधुनिक और दीर्घकालिक जल निकासी योजना तैयार करने की पहल की जा रही है, ताकि भविष्य में जलभराव की समस्या से लोगों को निजात मिल सके।





