सरकारी राहत के तिरपाल जलाने का आरोप, नाराज लोगों ने किया विधायक के घर का घेराव

July 9, 2026 12:18 AM

पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर इलाके में मंगलवार दोपहर उस वक्त भारी तनाव और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई, जब एक स्थानीय विधायक पर सरकारी राहत सामग्री (तिरपाल) को गुपचुप तरीके से जलाने का आरोप लगा। इस घटना से आक्रोशित स्थानीय लोगों ने विधायक के घर का घेराव कर उग्र विरोध प्रदर्शन किया।

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेदिनीपुर शहर के एक आवासीय इलाके में स्थित विधायक के घर (गैरेज के पास) अचानक आग जलती हुई देखी गई। जल्द ही यह खबर पूरे इलाके में फैल गई कि गरीबों में बांटे जाने वाले सरकारी तिरपालों को जलाकर नष्ट किया जा रहा है। खबर मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, विशेषकर महिलाएं मौके पर पहुंच गईं और हंगामा शुरू कर दिया।

​स्थानीय लोगों का क्या कहना है?

गुस्साए ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि आपदा और बारिश के समय जब उन्हें तिरपाल की सख्त जरूरत थी, तब बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें खाली हाथ लौटा दिया गया था। एक स्थानीय महिला ने बताया, “जब हम मदद मांगने आए तो हमें कुछ नहीं मिला, और आज हम अपनी आंखों के सामने इन तिरपालों को जलता हुआ देख रहे हैं।”

​आरोप है कि यह सब सबूत मिटाने के लिए किया गया। मौके पर पहुंची कुछ महिलाओं ने गोदाम के अंदर घुसकर कुछ सही-सलामत तिरपाल बाहर भी निकाल लिए। स्थानीय लोगों और विपक्षी नेताओं का यह भी दावा है कि आग में जलने वाला पदार्थ मोम की तरह पिघल रहा था, जो इस बात का पक्का सबूत है कि वह केवल साधारण प्लास्टिक नहीं, बल्कि असली तिरपाल था। लोगों ने बीच बस्ती में इस तरह से प्लास्टिक जलाने को लेकर वायु प्रदूषण फैलाने का भी आरोप लगाया।

​विधायक ने दी सफाई:

चारों तरफ से घिरने और सवालों की झड़ी लगने के बाद, विधायक ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि सरकारी तिरपाल जलाने की बात पूरी तरह से झूठी और निराधार है। उनके अनुसार, गोदाम में काफी समय से रखे होने के कारण चूहों ने तिरपाल के पैकेटों को काट दिया था और वहां सांप भी निकलने लगे थे। इसलिए साफ-सफाई के दौरान केवल तिरपाल के फटे हुए कवर, खाली पैकेट और कुछ अन्य कचरा जलाया जा रहा था।

​अभी क्या है स्थिति?

हालांकि, इलाके के लोग विधायक की इस दलील को मानने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं। लोगों का सीधा सवाल है कि अगर वे केवल पैकेट थे, तो इतने दिनों तक असल तिरपाल जरूरतमंदों को क्यों नहीं बांटे गए? इस पूरे घटनाक्रम को लेकर इलाके में अब भी भारी रोष और चर्चा का माहौल बना हुआ है।

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