नगर पालिका में काम काज सामान्य करने की मांग को लेकर कांग्रेस व वामदलों का विरोध प्रदर्शन, मधुकामी का दावा हमारे आंदोलन के दबाव से कर्मचारियों को वेतन

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बीते एक पखवाड़े से रेलनगरी खड़गपुर की पौर-सभा , भूतपूर्व पौर- प्रधान प्रदीप सरकार के इस्तीफा सौंपने के बाद से एक तरफ जहां इस्तीफा सवालों के घेरे में है वहीं दूसरी तरफ पौर-सभा फिलहाल पौर-प्रधान विहीन अवस्था के सम्मुखिन होने के कारण आर्थिक लेनदेन की कार्रवाइयां की शुरुआत की गई है। पौर-सभा के कानून अनुसार पौर-प्रधान की अनुपस्थिति में सारी कार्रवाई उप पौर-प्रधान के अधीन रहने की बात है कितु ” डिजिटल सिगनेचर सर्टिफिकेट”(DSC) के इस्तेमाल पर कुछ कानूनी अडचनें थी नतीजतन पौर कर्मियों को वेतन मिलने में असुविधा हो रही थी इधर उप-प्रधान तैमूर अली खान , पौर-सभा के कार्रवाई में जारी जटिलता को मिटाने की कोशिश में अपनी DSC ट्रेजरी में जमा कर दिए जाने के बाद गुरुवार को कर्मचारियों को तनख्वाह मिलने की खबर है। पौरसभा की एक अधिकारी के हवाले से खबर है कि कर्मचारियों के तनख्वाह के अलावा अन्य लेनदेन के मामले में उनका DSC का प्रयोग किया जा सकेगा या नही इस पर नगरोन्नयन दफ्तर की सलाह का इंतजार है। मालूम हो बीते 21 दिसंबर को तृणमूल के एक विक्षुब्ध धड़े के अतिशय दबाव व असहयोग के कारण तत्कालीन पदासीन पौर-प्रधान प्रदीप सरकार को मजबूरन पद से इस्तीफा देना पड़ा था . बेशक आखिरी लम्हे तक पद पर बने रहने के लिए प्रदीप ने पूरजोर कोशिश की थी पर विरोधी ही भारी पडे़ थे बैशक इस्तीफे की प्रक्रिया अब भी सवालों के घेरे में है।

इस्तीफे को लेकर कांग्रेस व माकपा के प्रतिनिधिमंडल बीते दिनों एसडीओ से मिलने की कोशिश की थी हांलाकि एसडीओ के ना मिलने से ज्ञापन रिसीव करा लिया गया था। इधर आज भी कांग्रेस व वामपंथी दलों की ओर से पौरसभा के चेयरमैन की स्थिति स्पष्ट करने को लेकर एसडीओ कार्य़ालय में विरोध सभा आयोजित की गई थी।

खड़गपुर नगरपालिका के विपक्षी दल के नेता मधु कामी का कहना है कि हमारे विरोध प्रदर्शन के दबाव में आकर ही आनन फानन में कर्मचारियों को तनख्वाह देने की जुगत भिड़ाई गई हांलाकि तनख्वाह मिलने से वे लोग खुश है लेकिन किसी भी मामले में पारदर्शिता नहीं है। उनका कहना है कि पार्षदों को इस्तीफे के जेरोक्स नगरपालिका की ओर से भेजे गए थे जिसमें इस्तीफे में बोर्ड आफ काउंसिलर को सौंपने की बात कही गई है जबकि व्यावहारिक तौर पर इस्तीफे के लिए बोर्ड आफ काउंसिलर की बैठक ही नहीं बुलाई गई थी।

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