





खड़गपुर प्रौद्योगिकी संस्थान के कालिदास प्रेक्षागृह में बीते शनिवार क काव्य रसास्वादन हेतु काव्य रसिकों की एक महफिल सजी। जिसमें देश के अलग अलग शहरों के नामचीन युवा हस्ताक्षरों ने शिरकत की और अपने कला , अदायगी , विचार और भाव पेश किए और श्रोताओं को मंत्रमुग्धकर समां बांध दी।



कवयित्री हिमांशी बावरा के शेर –

दिल यूं मुब्तिला हुआ तेरे मलाल में । जुल्फें सफेद हो गई उन्नीस साल में।। पर बहुत वाह वाही हुई ।
ज्ञान प्रकाश आकुल की ये पत्तियां भी बहुत सराही गई –
डूब गए जो ऊपर होने निकले थे ।
वे प्रश्नों के उत्तर होने निकले थे ।।
शहर में जो मजदूरों की लाइन है।
ये लड़के भी अफसर होने निकले थे।
और डा प्रवीण शुक्ल को इन अशआर को श्रोताओं ने हाथों हाथ लिया –
कैसे कह दूं कि थक गया हूं मैं।
जाने किस किस का हौसला हूं मैं।
तू मेरी रूह में समाया है ।
सबसे कह दे , तेरा पता हूं मैं ।।
साथ ही डा अक्षत डिमरी की नर्म एहसासो की बानगी कुछ यूं सामने आई –
तेरी संगत से उकता कर हजारों संग जा बैठा।
समंदर से खफा दरिया फुहारों संग जा बैठा।।
जमी पर पहले रहता था जिसे सब चांद कहते है।
तुम्हारे हुस्न से जलकर सितारों संग जा बैठा।।
इन्हें भी काफी वाह वाही हासिल हुई ।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वीर रस के कवि डा विनीत चौहान अपने ओजस्वी स्वर में वीर रस की कई रचनाएं प्रस्तुत की जिसमें
ऑपरेशन सिंदूर के हवाले से उहोने कहा –
है गर्व हमें निज सेना पर जिसने यह विजय कथा बाँची ।
इस बार बेटियां दुश्मन के सर पर चंडी बनकर नाची ।।
ये पंक्तियां श्रोताओं में गजब का उत्साह का संचार कर दी और प्रेक्षागृह भारत माता की जय की जयकारे से गूंज उठा ।
कार्यक्रम का सफल संचालन डा राजीव रावत ने की ।
उक्त कार्यक्रम राजभाषा विभाग , खड़गपुर प्रौद्योगिकी संस्थान व प्रौद्योगिकी संस्थान के खनन इंजीनियरिंग विभाग की समवेत प्रस्तुति रही।






