





पश्चिम मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर आंतरिक कलह और असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। हाल ही में मेदिनीपुर संगठनात्मक जिला तृणमूल कांग्रेस के सह-सभापति और जिला परिषद के कर्मध्यक्ष निर्मल घोष का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। खड़गपुर में पत्रकारों से बात करते हुए वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए और पार्टी के वर्तमान नेतृत्व, विशेषकर अभिषेक बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए।



भावुक होकर छलका दर्द

निर्मल घोष ने रोते हुए कहा कि जिस दल को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा था, उसे अभिषेक बनर्जी के फैसलों ने खत्म कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में अब पुराने और अनुभवी नेताओं की कोई जगह नहीं बची है। घोष के अनुसार, पार्टी के भीतर अब ऐसे लोगों को तवज्जो दी जा रही है जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है, जबकि जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं को धक्के मारकर बाहर निकाला जा रहा है।
अभिषेक बनर्जी और ‘I-PAC’ पर निशाना
निर्मल घोष ने चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था ‘I-PAC’ और अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा:
”पार्टी अब गलत निर्णय ले रही है। हम जैसे वरिष्ठ नेताओं की बात सुनने वाला कोई नहीं है। शुभेंदु अधिकारी जैसे कद्दावर नेता के पार्टी छोड़ने के पीछे भी यही गलत नीतियां जिम्मेदार थीं। आज स्थिति ऐसी है कि अनुभवी नेताओं को अपमानित किया जा रहा है।”
पुराने दिनों को किया याद
बातचीत के दौरान घोष काफी पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के साथ बिताए समय का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बड़े-बड़े नेताओं के साथ काम किया है, लेकिन वर्तमान में पार्टी के भीतर बोलने की आजादी खत्म हो गई है। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि 2021 के चुनाव में भी उनके साथ अन्याय हुआ और उनकी टिकट काट दी गई थी।
शुभेंदु अधिकारी की सराहना
दिलचस्प बात यह रही कि निर्मल घोष ने शुभेंदु अधिकारी की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शुभेंदु ने एक बार उनके नाम का प्रस्ताव जिला अध्यक्ष के लिए दिया था। शुभेंदु के प्रति अपना स्नेह दिखाते हुए उन्होंने कहा कि भले ही वे आज दूसरे दल में हों, लेकिन मेदिनीपुर के विकास के लिए और लोगों के हित में वे हमेशा साथ खड़े रहेंगे।
निष्कर्ष
निर्मल घोष का यह सार्वजनिक रूप से फूट-फूट कर रोना और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ बोलना आगामी चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। मेदिनीपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में पुराने कार्यकर्ताओं का यह असंतोष आने वाले समय में क्या रुख लेता है, यह देखना दिलचस्प होगा।









