





पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर आज, 10 मार्च 2026 को उच्चतम न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।



अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunals) का होगा गठन:-

अदालत ने आदेश दिया है कि उन लोगों के लिए तुरंत ‘अपीलीय न्यायाधिकरण’ बनाए जाएं जिनके मतदाता सूची में नाम शामिल करने के दावों को खारिज कर दिया गया है।
**इन ट्रिब्यूनल में सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश शामिल होंगे।
**कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इन न्यायाधिकरणों के गठन की निगरानी करेंगे।
न्यायिक अधिकारियों के सम्मान पर सख्त रुख:-
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने उन याचिकाकर्ताओं को कड़ी फटकार लगाई जिन्होंने इस संशोधन प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारियों (JOs) की निष्ठा पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा:”किसी को भी न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए।” अदालत ने साफ किया कि वह चुनावी रोल संशोधन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों के मनोबल को गिराने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं करेगी।
अब तक की प्रगति और डेटा:-
अदालत को सूचित किया गया कि अब तक न्यायिक अधिकारियों ने 10.16 लाख से अधिक आपत्तियों और दावों का निपटारा कर दिया है। इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए:
•पश्चिम बंगाल के 500 अधिकारी तैनात हैं।
•पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड से 200 अतिरिक्त अधिकारियों की मदद ली जा रही है।
पारदर्शिता के लिए नए निर्देश:-
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश दिया है कि:
**मतदाता पंजीकरण पोर्टल की तकनीकी खामियों को तुरंत दूर किया जाए।
**जैसे-जैसे आपत्तियों का निपटारा हो, हर जिले में सप्लीमेंट्री (पूरक) मतदाता सूची प्रकाशित की जाए ताकि जनता को सटीक जानकारी मिल सके।
**बाहर से आए न्यायिक अधिकारियों को हर संभव लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की जाए।










