





देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। संस्थान के विभिन्न हॉस्टलों (Halls of Residence) में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत हो गई है, जिसके कारण छात्रों के खान-पान पर संकट मंडराने लगा है।



क्या है पूरा मामला?

हाल ही में सामने आई रिपोर्टों और मेस प्रबंधन द्वारा प्रशासन को लिखे गए एक आधिकारिक पत्र के अनुसार, संस्थान में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति में भारी कमी आई है। इस संकट की वजह से कई हॉस्टलों की मेस में खाना पकाने में कठिनाई हो रही है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मेस कमेटी को डर है कि अगर जल्द ही आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो छात्रों को भोजन उपलब्ध कराना असंभव हो जाएगा।
पत्र में जताई गई चिंता:-
मेस प्रबंधन की ओर से लिखे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि गैस वेंडरों की ओर से आपूर्ति बाधित है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर है। प्रबंधन ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और वेंडरों के साथ बकाया भुगतान या अन्य लॉजिस्टिक मुद्दों को हल करने की मांग की है, ताकि छात्रों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर इसका असर न पड़े।
छात्रों पर असर:-
संस्थान में हजारों छात्र निवास करते हैं जो पूरी तरह से हॉस्टल की मेस पर निर्भर हैं। गैस की कमी के कारण मेनू में कटौती की जा रही है और कुछ मामलों में खाने की गुणवत्ता और समय पर भी असर पड़ रहा है। छात्रों के बीच इस स्थिति को लेकर काफी असंतोष है, क्योंकि परीक्षाओं और शोध कार्यों के बीच उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।प्रशासन का रुखहालांकि इस मामले पर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रशासन आपूर्ति बहाल करने के लिए संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ दिनों में गैस की किल्लत दूर कर ली जाएगी।
युद्ध का असर
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की आशंकाओं के बीच घरेलू गैस सिलेंडरों के संकट ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। खड़गपुर के मालंच सुपर मार्केट स्थित एक गैस एजेंसी के बाहर आज शुक्रवार की सुबह से ही उपभोक्ताओं की भारी भीड़ देखी गई। स्थिति यह है कि लोग सुबह की पहली किरण के साथ ही लाइनों में लग रहे हैं, लेकिन गैस मिलने की कोई गारंटी नहीं दिख रही।घरेलू सिलेंडरों की हो रही कालाबाजारी:-स्थानीय लोगों का आरोप है कि व्यावसायिक (Commercial) सिलेंडरों की आपूर्ति में सख्ती और बढ़ती कीमतों के कारण होटल, रेस्तरां और छोटे खाने के स्टालों पर अब धड़ल्ले से घरेलू सिलेंडरों का उपयोग हो रहा है। आरोप यह भी है कि गैस एजेंसी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से घरेलू सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर काले बाजार (Black Market) में बेचा जा रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं के लिए कृत्रिम संकट पैदा हो गया है।
प्रशासन और गैस कंपनियों की ओर से आपूर्ति सामान्य होने के आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। कालाबाजारी और रसूखदारों को प्राथमिकता मिलने के कारण “आम आदमी” को घंटों कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है।यह देखना चुनौतीपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन इस कालाबाजारी को रोकने और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करने के लिए क्या कड़े कदम उठाता है।









