





पश्चिम बंगाल में चुनावी बिगुल बजते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। रविवार को चुनाव आयोग द्वारा राज्य में चुनाव की तारीखों और कार्यक्रम (निर्वाचन निर्घंट) की घोषणा किए जाने के ठीक बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग ने बेहद आक्रामक रूप ले लिया है। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए एक बड़ा दावा किया है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।



‘विसर्जन का काउंटडाउन’ शुरू

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार की विदाई का समय अब करीब आ गया है। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा हाल ही में घोषित विभिन्न भत्तों और बकाया महंगाई भत्ते (DA) के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता अब इन चुनावी वादों के झांसे में नहीं आने वाली। भट्टाचार्य ने कड़े शब्दों में कहा, “राज्य की जनता ने अब शासक दल को विदा करने का मन बना लिया है। आज से तृणमूल सरकार के ‘विसर्जन का काउंटडाउन’ शुरू हो गया है।”
मई के दूसरे सप्ताह में परिवर्तन का दावा
छवि में दिए गए संदेश के अनुसार, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने एक निश्चित समय सीमा की भविष्यवाणी की है। उन्होंने दावा कि
या कि चुनाव के नतीजे आने के बाद, मई के दूसरे सप्ताह में ही पश्चिम बंगाल में एक नई सरकार सत्ता में आएगी। उनका कहना है कि राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय ‘नबन्ना’ (Nabanna) में अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समय समाप्त हो चुका है और जल्द ही वहां भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का ध्वज लहराएगा।
डीए (DA) और जनविरोधी नीतियों पर प्रहार
शमिक भट्टाचार्य ने अपने बयान में राज्य सरकार के कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित डीए के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ राज्य सरकार फंड की कमी का रोना रोती है, वहीं दूसरी ओर चुनाव से ठीक पहले भत्तों की घोषणा कर मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राइटर्स बिल्डिंग से लेकर नबन्ना तक, शासन के तरीकों से राज्य की जनता ऊब चुकी है और अब वास्तविक बदलाव चाहती है।
चुनावी माहौल हुआ गरम
चुनाव आयोग की घोषणा के बाद से ही पूरे बंगाल में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और राजनीतिक दलों ने अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करना शुरू कर दिया है। भाजपा जहां ‘परिवर्तन’ के नारे के साथ मैदान में है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपनी विकास योजनाओं और ‘बंगाल की बेटी’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। हालांकि, शमिक भट्टाचार्य के इस ताजा दावे ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का मुकाबला बेहद कड़ा होने वाला है। शमिक भट्टाचार्य का यह दावा कि “मई के दूसरे सप्ताह में ही पश्चिम बंगाल एक नई सरकार देखेगा”, केवल एक चुनावी नारा है या राज्य में सत्ता परिवर्तन की आहट, यह तो आने वाला समय और जनता का जनादेश ही तय करेगा। फिलहाल, बंगाल की राजनीति ‘नबन्ना’ पर कब्जे की इस जंग के लिए पूरी तरह तैयार है।
के जी पी न्यूज़ संवाददाता द्वारा प्रेषित।





